वृंदावन की जन्माष्टमी: आधी रात का उत्सव कैसा होता है
कृष्ण जन्मदिन पर वृंदावन में क्या होता है, व्रत और भोग की सीधी बातें।
अपडेट: 25 Oct 2026
भाद्रपद मास की कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि को श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। कथा है कि मथुरा के कारागार में जन्म हुआ और उसी रात पिता वसुदेव उन्हें गोकुल में नंद जी के घर छोड़ आए। इसीलिए जन्म का समय आधी रात माना जाता है।
उस दिन वृंदावन के मंदिरों में दिनभर भीड़ रहती है। बहुत से लोग व्रत रखते हैं और रात की जन्म आरती के बाद व्रत खोलते हैं। ठाकुर जी को नई पोशाक पहनाई जाती है, झूले में बिठाकर झुलाया जाता है, और माखन-मिश्री, दूध की मिठाई व फल का भोग लगता है।
कहा जाता है कि बाँके बिहारी मंदिर में मंगला आरती साल में सिर्फ़ जन्माष्टमी पर होती है। समय, भीड़ और नियम हर साल थोड़े बदलते हैं, इसलिए जाने से पहले मंदिर से पूछ लें।
जो नहीं जा सकते
सब लोग उस दिन वृंदावन में नहीं हो सकते। वे घर पर ही जन्मोत्सव मनाते हैं: छोटा सजा हुआ झूला, माखन-मिश्री का भोग, आधी रात को शंख। वृंदावन से आया प्रसाद उस भोग के पास रखने पर लगता है कि वहाँ की थोड़ी सी छाप घर तक आ गई। उत्सव से कुछ दिन पहले ऑर्डर कर लें, क्योंकि इन दिनों डिलीवरी में ज़्यादा समय लग सकता है।