वृंदावन का प्रसाद · आपके नाम से पूजा · पूजा के फ़ोटो व वीडियो · राधे राधे
हिन्दी

वृंदावन के मंदिरों में जाने के शिष्टाचार

पहली बार जाने वालों के लिए जूते, कपड़े, फ़ोन, भीड़ और बंदरों जैसी छोटी पर काम की बातें।

अपडेट: 25 Oct 2026

वृंदावन के मंदिरों में जाने के शिष्टाचार

वृंदावन के मंदिर भक्तों के लिए जीवित उपासना के स्थान हैं। कुछ छोटी बातें याद रखें तो दर्शन शांति से होते हैं।

जूते और कपड़े

मंदिर के बाहर जूते उतारे जाते हैं और कई जगह उन्हें रखने की व्यवस्था है। शालीन कपड़े पहनें; कंधे और घुटने ढके हों तो अच्छा है।

फ़ोन, बैग और फ़ोटो

कुछ मंदिरों में फ़ोन, कैमरा या बड़े बैग अंदर नहीं ले जा सकते। नियम हर मंदिर के अलग हैं, इसलिए गेट पर लगी सूचना पढ़ें या कर्मचारियों से पूछ लें। फ़ोन साइलेंट पर रखें।

भीड़ और समय

उत्सव और छुट्टी के दिन भीड़ अधिक होती है। बुज़ुर्गों के साथ जाएँ तो सुबह जल्दी जाना आसान रहता है। अधिकांश मंदिर दोपहर में कुछ घंटे बंद रहते हैं और दर्शन का समय मौसम के अनुसार बदलता है, इसलिए उसी दिन पता कर लें।

बंदर

वृंदावन में बहुत बंदर हैं जो चश्मा, फ़ोन या प्रसाद के पैकेट छीन सकते हैं। इन्हें हाथ में न रखकर बैग में रखें और उन्हें खाने की चीज़ न दिखाएँ।

दान

देना चाहें तो मंदिर के अपने काउंटर पर दें। जो ज़िद करे उससे सावधान रहें।

प्रसाद क्या है? हिंदू पूजा में प्रसाद का अर्थ और महत्व

प्रसाद वह भोजन या अर्पण है जो पहले देवता को चढ़ाया जाता है और फिर भक्तों में बाँटा जाता है। जानिए इसका अर्थ और ग्रहण करने की परंपरा।

और पढ़ें